November 26, 2020
Raksha Bandhan 2020

Raksha Bandhan 2020 । Raksha Bandhan History in Hindi

Raksha Bandhan 2020

Raksha Bandhan 2020 भगवान श्रीकृष्ण को श्रुत देवी नाम की एक चाची थी। उसने एक विकृत बच्चे को जन्म दिया था। उसका नाम शिशुपाल था। पूर्वजों के अनुसार पता चलता हैं की जिस व्यक्ति के हाथों शिशुपाल स्वस्थ होंगा उसीके हाथो उसकी मौत भी होंगी।

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एक दिन भगवान श्रीकृष्ण अपने चाची के घर आए थे। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को अपने हाथों में लिया वह बच्चा एकदम स्वस्थ और सुन्दर हो गया। श्रीकृष्ण की चाची अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर बोहोत ही खुश हो

गयी लेकिन अपने बच्चे की मृत्यु श्रीकृष्ण के हाथो होने की संभावना से बेहद विचलित और भयभीत हो गयी। उसने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की के अगर शिशुपाल कोई भी गलती कर बैठे लेकिन श्रीकृष्ण के हाथो उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए।

भगवान श्रीकृष्णने अपनी चाची को वचन दिया की में शिशुपाल की गलतियों को माफ़ कर दूंगा लेकिन अगर वह सौ से अधिक गलतियाँ करेंगा तो में उसे जरुर सजा दूंगा।

शिशुपाल बड़ा होकर चेडी नामक राज्य का राजा बन गया। शिशुपाल एक राजा भी था और भगवान श्रीकृष्ण का करीबी रिश्तेदार भी। लेकिन वह बोहोत ही घमंडी और क्रूर राजा था। वह अपने राज्य के लोगों को बोहोत सताता था और भगवान श्रीकृष्ण को चुनोती देने लगा।

Raksha Bandhan History in Hindi

Raksha Bandhan 2020

एक दिन भरी राजसभा में शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण की निंदा की और उसी दिन शिशुपाल ने सौ गलतियों की सीमा को पार कर दिया। भगवान श्रीकृष्णने सुदर्शन चक्र का प्रयोग शिशुपाल पर किया और उसकी मृत्यु हो गयी।

क्रोध में आकर जब भगवान श्रीकृष्णने अपने सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया तब उनकी उंगली में भी चोट लगी थी। उस जख्म पर कुछ बांधने के लिए राजसभा में मौजूद सभी इधर उधर भागने लगे लकिन द्रोपदी ने बिना कुछ सोचे अपने साडी के कोने को फाड़कर भगवान श्रीकृष्ण के घाव पर बाँधा।

तबी भगवान श्रीकृष्णने द्रोपदी से वादा किया की जिस तरह तुमने मेरे कष्ट में मेरा साथ दिया उसी तरह में भी तुम्हारे कष्ट में तुम्हारा साथ जरुर दूंगा। यह कहकर भगवान श्रीकृष्णने द्रोपदी की रक्षा करने का आशवासन दिया और इस घटनासे रक्षा बंधन का प्रारंभ हुआ।

रक्षाबंधन का इतिहास

कुछ समय बितने के बाद जब पांडवों ने भरी राजसभा में द्रोपदी की साडी खींचकर उसका अपमान करने का प्रयत्न किया तभी भगवान श्रीकृष्णने द्रोपदी की सहायता करके दिया हुआ वादा पूरा किया था।

उस समय से सभी बहने अपने भाइयों के कलाई पर राखी बांध रही है और बदले में जीवनभर अपने बहन की रक्षा करने का आश्वासन सभी भाई करते है।

सावन महीने के पूर्णिमा पर राखी के अलावा कुछ और त्यौहार भी मनाये जाते है। महाराष्ट्र और केरल में इस दिन को नारली पूर्णिमा कहा जाता है इस दिन सभी समुद्र देवता की पूजा करके समुद्र का आभार व्यक्त करते है। ओड़िसा और पछिम बंगाल में राधा कुष्ण की मूर्तियों को पालने में रखकर झुला झुलाते है। इसे झूलन पूर्णिमा कहा जाता है। उत्तर भारत में इस दिन गेहू के बिज बोए जाते है इस दिन को कजरी पूर्णिमा कहा जाता है।

भारत में इस दिन अलग अलग जगह अलग अलग उत्सव मनाए जाते है लेकिन इनमे से सबसे लोकप्रिय त्योहार होता है “रक्षाबंधन”।

Raksha Bandhan Story